महिलाएं भी करा सकती हैं उपनयन संस्कार : महिलाएं भी धारण कर सकती हैं जनेऊ !

महिलाएं भी करा सकती हैं उपनयन संस्कार :
महिलाएं भी धारण कर सकती हैं जनेऊ          

हिंदू धर्म की वैदिक रीतियां देती हैं महिला उपनयन संस्कार की इजाजत 

महिलाओं को पुरुषों के समान बराबरी का अधिकार वैदिक काल से प्राप्त है। तभी तो वैदिक रीति में महिलाओं को भी उपनयन संस्कार की इजाजत दी गई है। मातृ शक्ति वैदिक काल से सर्वोपरि और पूजी जाति रही है। 

आर्ट ऑफ लिविंग के जरिये रविशंकर महाराज पूरे देश में महिलाओं को जगा रहे हैं कि पुरुषों की तरह उन्हें भी वैदिक काल से उपनयन संस्कार कराने का अधिकार प्राप्त है। उत्तर प्रदेश में भी जगह-जगह आयोजन हो रहा है। 

जिम्मेदारियों का अहसास कराता है जनेऊ

-उपनयन संस्कार के बाद धारण किया जाता है जनेऊ

-जनेऊ केतीन धागे हैं तीन जिम्मेदारियों के प्रतीक

क्। परिवार के प्रति जिम्मेदारी

ख्। अपना ज्ञानवर्धन करने की जिम्मेदारी

फ्। समाज के प्रति जिम्मेदारी

उपनयन संस्कार से लाभ

-कंट्रोल में रहेगी शारीरिक व मनोस्थिति

-सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार

-मन रहेगा एकाग्रचित

-फोकस प्वाइंट, कंसंट्रेशन होगा बेहतर

-ध्यान की गहराई में जाने में मददगार साबित होगा उपनयन संस्कार

उपनयन के बाद ये करना होगा

-महिलाओं को भी जनेऊ पहनना पड़ेगा

-जनेऊ धारण करने के बाद पुरुषों के लिए जो नियम है, महिलाओं को भी उन्हीं नियमों का पालन करना होगा

-तामसिक भोजन, मांस आदि से रहना होगा दूर

-सात्विक प्रक्रिया का ही करना होगा पालन

-प्रतिदिन करना होगा गायत्री मंत्र का जाप

-जागृत, स्वप्न, सुसुप्ता, तुरया- अवस्था में ध्यान से ज्यादा शांति मिलती है-

मन स्थिर रहेगा तो ऊर्जा का संचार होगा

ये है उपनयन संस्कार की प्रक्रिया-

-उपनयन संस्कार के लिए आने-वाले महिला-पुरुष या फिर बटुक की कराई जाती है जल से शुद्धि

-फिर सभी दिशाओं में कराया जाता है प्रणाम

-प्रणाम के बाद होता है मंत्र का आह्वान

-मंत्रों के आह्वान के बाद गायत्री मंत्र का जाप, फिर प्राणायाम और हवन

-चार दिन की प्रक्रिया के बाद पूरा हो जाता है !

उपनयन संस्कार

गायत्री मंत्र जाप से मिलती है अद्भुत शक्ति

ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात

गायत्री मन्त्र एक अपूर्व शक्तिशाली मंत्र है, जिसे रक्षा कवच मन्त्र भी कहा गया है। यह वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतरता है, इसीलिए उपनयन संस्कार के दौरान गायत्री मंत्र का जाप कराया जाता है।

वेद शास्त्र महिलाओं और पुरुषों में भेद नहीं करते हैं। उपनयन गुरु के पास जाने और शिक्षा प्राप्त करने का एक संस्कार है। आर्ट ऑफ लिविंग में चल रहे उपनयन संस्कार के जरिए हमें ये जानकारी मिल रही है कि मन को कैसे एकाग्र किया जा सकता है। जीवन को किस तरह और बेहतर बनाया जा सकता है।



Santoshkumar B Pandey at 10.50Am.

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